फिर से तलवारे उठ जाने दो


फिर से तलवारे उठ जाने दो

एक बार फिर क्राँति हो जाने दो

महाराणा फिर स्वच्छंद घूमेगा

चेतक की टापो से आकाश गूँजेगा

शिवाजी भी मुल्लो को ललकारेगे

हम भी आतंकियो को घर मेँ घुसकर मारेगे

गुरु गोविन्द सिह को भी स्वाभिमान सिखाने दो

वीर सावरकर को हिन्दुत्व जगाने दो

एक बार फिर कुछ देशद्रोही कट जाने दो

एक बार फिर तलवारे उठ जाने दो

एक बार फिर राम मारेगे रावन को

एक बार कंस को कृष्ण के हाथो कट जाने दो

परशुराम जी भी जब शस्त्र धारण करेगे

अभिमानी डर कर भागेगे

एक बार फिर भगवान को आ जाने दो

एक बार फिर राक्षसो को कट जाने दो

अहिँसा से हो जायेगा वीरता का अँत

अब देश को बचायेगा एक सँत

मत आओ देशद्रोहियो के भ्रमजालोँ मेँ

वरना फिर से होगा भगत सुभाष का अँत

एक बार फिर देशभक्तो को हुँकार लगाने दो

एक बार फिर तलवारे उठ जाने दो

माँ भारती के सपूतो का खून अब भी गर्म है

देशरक्षा ही सनातनियो का धर्म है

माँ भारती का अपमान नही सहेगा हिँदूस्थान

गौ रक्षा ही हमारा कर्म है

खून को पानी न बनाओ यारो

देश के लिये तलवारे उठाओ यारो

स्वदेशी अपनाकर स्वदेश बचाओ यारो

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Posted on October 9, 2011, in poems. Bookmark the permalink. Leave a comment.

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