क्या भगवत गीता हिंसा को बढ़ावा देने वाला धर्म ग्रन्थ हैं?


dr vivek arya

सदियों से संसार के सबसे ज्यादा शांतिप्रिय और सहनशील हिन्दू समाज जिसकी मुख्य शक्ति उसकी अध्यात्मिक विचारधारा हैं, जिसके कारण वह आज भी जीवित हैं और संपूर्ण संसार को प्रेरणा दे रही हैं पर निरंतर हमले होते रहे हैं. इसी श्रृंखला में एक ओर नाम रूस के तोम्स्क नामक नगर की अदालत से हिंदुयों के महान ग्रन्थ श्री मदभगवत गीता को उग्रवाद को बढावा देने वाला और कट्टरपंथी होने का फरमान हैं. १९९० के रूस के टुकड़े टुकड़े होने से देश में राजनैतिक उथल पुथल के साथ साथ अध्यात्मिक उथल पुथल भी हुई. एक समय साम्यवाद के नाम पर नास्तिकता को बढ़ावा देने वाले रूस में १९९० के बाद चर्च विशेषरूप से सक्रिय हो गया क्यूंकि उसे लगा की उसे खोई हुई ईसा मसीह की भेड़े दोबारा वापिस मिल जाएगी. इस्कान द्वारा विश्व भर में उनके गुरु प्रभुपाद द्वारा भाष्य करी गयी गीता का रूसी अनुवाद होने के बाद नास्तिक देश रूस में गीता का व्यापक प्रचार हुआ. मांस, वोदका (शराब) और स्वछंद विचारधारा को मानने वाले देश में शाकाहार, मदिरा से परहेज और ब्रहमचर्य का व्यापक प्रचार हुआ. इस प्रचार से हजारों की संख्या में रूसी लोगों ने गीता को अपने जीवन का अध्यात्मिक ग्रन्थ स्वीकार कर उसकी शिक्षाओं को अपने जीवन में उतरा. पहले से ही बदहाल और बंद होकर बिकने के कगार पर चल रहे ईसाई चर्च को चिंता हुई की अगर गीता का प्रभाव इसी प्रकार बढ़ता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब पूरे रूस में मसीह का कोई भी नाम लेने वाला न रहेगा. इसलिए एक षडयन्त्र के तहत सुनियोजित तरीके से अदालत में केस दर्ज करवा कर गीता पर प्रतिबन्ध लगाने का प्रयास किया गया. गीता में श्री कृष्ण जी द्वारा अर्जुन को युद्ध भूमि में अपने ही सगे सम्बन्धियों के विरुद्ध युद्ध करने का आवाहन अर्जुन के मोह को दूर कर एक क्षत्रिय के धर्म का पालन कर पापियों अर्थात अधर्म का नाश करने का और धर्म की स्थापना करने का आवाहन किया गया हैं. इसे कोई मुर्ख ही उग्रवादी और कट्टरवादी कहेगा.सोचिये रूस का ही कोई नागरिक देश,जाति और धर्म के विरुद्ध कार्य करेगा तो रूसी संविधान के तहत उसे दंड दिया जायेगा या फिर नहीं दिया जायेगा और अगर कोई उस संविधान को हिंसक, मानवाधिकारों का हनन करने वाला,उग्रवादी और कट्टरवादी कहेगा तो आप उसे मुर्ख नहीं तो और क्या कहेगे. इसी प्रकार गीता में समाज में आचरण और व्यवहार करने का जो वर्णन हैं उसे कट्टरपंथी कहना निश्चित रूप से गलत हैं.

अब जरा गीता को कट्टरपंथी कहने वाले ईसाई समाज की धर्म पुस्तक बाइबल का अवलोकन करे की वह कितनी धर्म सहिष्णु और सेकुलर हैं.

Exodus – निर्गमन ३४.११-१४ में गैर ईसाईयों के साथ व्यवहार करने के बारे में देखिये क्या लिखा हैं

११. जो आज्ञा मैं आज तुम्हें देता हूं उसे तुम लोग मानना। देखो, मैं तुम्हारे आगे से एमोरी, कनानी, हित्ती, परिज्जी, हिब्बी, और यबूसी लोगोंको निकालता हूं।
१२. इसलिथे सावधान रहना कि जिस देश में तू जानेवाला है उसके निवासिक्कों वाचा न बान्धना; कहीं ऐसा न हो कि वह तेरे लिथे फंदा ठहरे।
१३. वरन उनकी वेदियोंको गिरा देना, उनकी लाठोंको तोड़ डालना, और उनकी अशेरा नाम मूतिर्योंको काट डालना;
१४. क्योंकि तुम्हें किसी दूसरे को ईश्वर करके दण्डवत्‌ करने की आज्ञा नहीं, क्योंकि यहोवा जिसका नाम जलनशील है, वह जल उठनेवाला ईश्वर है ही,

गीता में कहीं भी ईश्वर को जलने वाला नहीं लिखा हैं अर्थात द्वेष करने वाले नहीं लिखा हैं.फिर गीता कट्टरवादी धर्म ग्रन्थ कैसे हो सकती हैं.

Leviticus -लैव्यव्यवस्था २६.७-९ में लिखा हैं की जो शत्रु को मरते हैं बाइबल में वर्णित ईश्वर उन पर कृपा दृष्टि रखते हैं.

२६.७ और तुम अपके शत्रुओं को मार भगा दोगे, और वे तुम्हारी तलवार से मारे जाएंगे।
२६.८ और तुम में से पांच मनुष्य सौ को और सौ मनुष्य दस हजार को खदेड़ेंगे; और तुम्हारे शत्रु तलवार से तुम्हारे आगे आगे मारे जाएंगे;
२६.९ और मैं तुम्हारी ओर कृपा दृष्टि रखूंगा और तुम को फलवन्त करूंगा और बढ़ाऊंगा, और तुम्हारे संग अपक्की वाचा को पूर्ण करूंगा।

जब शत्रु को मारने की आज्ञा गीता में भी हैं और बाइबल में भी हैं तो गीता को उग्रवादी धर्म ग्रन्थ कहना अज्ञानता भी हैं और दुष्टता भी हैं.

Deuteronomy – व्यवस्थाविवरण २.३३ में बाइबल वर्णित परमेश्वर द्वारा शत्रु के पुत्रों को सेना समेत मार डालने का वर्णन हैं.

२.३३ और हमारे परमेश्वर यहोवा ने उसको हमारे द्वारा हरा दिया, और हम ने उसको पुत्रोंऔर सारी सेना समेत मार डाला।

क्या इसे आप बाइबल में हिंसा नहीं कहेंगे?

Genesis – -उत्पत्ति ११.५-७ में बाइबल वर्णित ईश्वर को भाषा की गड़बड़ी करने वाला बताया गया हैं.

११.५ जब लोग नगर और गुम्मट बनाने लगे; तब इन्हें देखने के लिथे यहोवा उतर आया।
११.६ और यहोवा ने कहा, मैं क्या देखता हूं, कि सब एक ही दल के हैं और भाषा भी उन सब की एक ही है, और उन्होंने ऐसा ही काम भी आरम्भ किया; और अब जितना वे करने का यत्न करेंगे, उस में से कुछ उनके लिथे अनहोना न होगा।
११.७ इसलिये आओ, हम उतर के उनकी भाषा में बड़ी गड़बड़ी डालें, कि वे एक दूसरे की बोली को न समझ सकें।

ईश्वर पर ऐसा दोष लगाने वाली पुस्तक बाइबल को क्या आप धर्म पुस्तक कहना पसंद करेगे?

Numbers – गिनती १२.९,१० में बाइबल के ईश्वर को रोग उत्पन्न करने वाला बताया गया हैं.

१२.९ तब यहोवा का कोप उन पर भड़का, और वह चला गया;
१२.१० तब वह बादल तम्बू के ऊपर से उठ गया, और मरियम कोढ़ से हिम के समान श्वेत हो गई। और हारून ने मरियम की ओर दृष्टि की, और देखा, कि वह कोढ़िन हो गई है।

कोई मुर्ख ही इस बात पर विश्वास करेगा को संसार में रोगों की उत्पत्ति का कारण ईश्वर हैं.

इस प्रकार की अनेक दोषपूर्ण, मुर्खतापूर्ण,अविवेकी,कट्टरवादी और उग्रवादी विचार धारा को मानने वाले इसाई मत की धर्म पुस्तक बाइबल को कोर्ट द्वारा धार्मिक सद्भावना और भाई चारे के वातावरण को नष्ट करने वाली कहना श्रेयकर होगा.संसार के बुद्धिजीवी वर्ग को एकजूट होकर इस प्रकार की सभी धर्म पुस्तकों पर पाबन्दी लगा देनी चाहिए न की गीता पर पाबन्दी लगनी चाहिए.और साथ ही साथ हिंदुयों के शत्रु यह भी याद रखे की

‘एक कहावत हैं जिनके घर शीशे के होते हैं वे दूसरों के घरों पर पत्थर नहीं फेंकते’

बाइबल के विषय में अधिक जानकारी के लिए Michael d, Souza से अरुण आर्यवीर बने आर्यजन द्वारा अपने जीवन पर लिखित पुस्तक इस पते पर पढ़ सकते हैं.

http://www.scribd.com/fullscreen/37705117

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Posted on December 20, 2011, in Christianity. Bookmark the permalink. 7 Comments.

  1. Geeta gyaan se pura vishvaa ek hone jaa rahaa hai..aur ish vajah se dushre desho main jo yeh shanshkruti ko nahi jaante par indirectly accept karte hai fir woh kon se bhi dharma se ho..to vartmaan samay main itnaa to pataa chala ki duniyaa ki har jo jivit hai woh vishvaa main (asatyaa ka virodh) matlab satyaa ka saath aur adharma(adhura gyaan) ka virodh kar rahaa hai fir woh hindu ho ya muslim ya fir catholic…JAY JAY SHREE RAM

  2. I think Indians or we should file a case against Bible saying tht it produces terrorist so that humans can get some amount of mind.

    • Brother!
      Namaskaar…

      I don’t think that will help. Majority of West does not take Bible seriously and probably that is the reason, why Christians have reformed and hence progressed. On the other hand, read Quran. Bible does not breed much terrorist and when Quran is considered, the violent verses of Bible become relatively peaceful.

      Indeed Yehowah is ruthless tyrant but Allah is much more dangerous. The biggest problem is: while Christians don’t take Bible seriously; Muslims do take Quran seriously. And a Christian terrorist does not say – I learnt terrorism from Bible while a Mohammedan says – I learnt massacre from Quran.

      If the people of Islam are asked about the proof for the soundness of their religion, they flare up, get angry and spill the blood of whoever confronts them with this question. They forbid rational speculation, and strive to kill their adversaries. This is why truth became thoroughly silenced and concealed.
      – Mohammed ibn Zakariya Razi
      A Persian Muslim scientist

      Our life here is truly hellish. Fortunately, my soldiers are very brave and tougher than the enemy. What is more, their private beliefs make it easier to carry out orders which send them to their death. They see only two supernatural outcomes: victory for the faith or martyrdom. Do you know what the second means? It is to go straight to heaven. There, the houris, God’s most beautiful women, will meet them and will satisfy their desires for all eternity. What great happiness!
      – Mustafa Kemal Ataturk
      Turkish Muslim army officer

      Our youths only want one thing, to kill you so they can go to paradise.
      – Osama Bin Laden
      Al – Qaeda head

      They say we are terrorists? They are right—of course we are. That is what we do for a living
      – Khalid Sheikh Muhammed
      Osama’s best friend

      Islamic Holy war against followers of other religions, such as Jews, is required unless they convert to Islam or pay the poll tax.
      – Al Amilli
      Author of Jami – i – Abbasi

      O prophet, thy penis is erect unto the sky!
      – Ali ibn Abi Talib
      A Muslim Caliph

      I love jihad. I love to stand there and fight for the sake of Allah.
      – Daniel Boyd
      An American Muslim terrorist

      It is clear that if a book teaches violence in the name of GOD, undoubtedly it is Quran, so protest against Quran.

  3. Rajeshkumar Arya

    Because Christianity itself is a violent religion, it wants to prove by hook or crook that all other religions are not different from it.

    Non-Christians, and especially Christians, kindly find time to read the following.
    If you can’t access them, I will send.

    1. Why I Am Not A Christian -Bertrand Russell
    2. Why I Am Not A Christian -Richard Carrier
    3. WHO WAS JESUS CHRIST – Charles Bradlaugh
    4. Truth about Jesus – M. M. Mangasarian
    5. Three Imposters (A Must Read)
    6. The Real Bible – Frank R. Zindler
    7. The Dark Bible – Jim Walker
    8. The Christ – John E Remsberg
    9. The Bible Unmasked – Joseph Lewis
    10. The Ten Commandments_Joseph Lewis
    11. Some Mistakes of Moses – Robert G. Ingersoll
    12. ROME OR REASON – Robert G. Ingersoll
    13. Myth and Miracles – Robert G. Ingersoll
    14. Inspiration of Bible – Robert G. Ingersoll
    15. Holy Bible – Robert G. Ingersoll
    16. Christian Religion – Robert G. Ingersoll
    17. PSYCHOLOGY OF PROPHETISM_Koenraad Elst
    18. Myth of St Thomas – Ishwar Sharan
    19. Mistakes of Jesus – William Floyd
    20. Life Of Jesus – Ernest Renan
    21. Judaism, Christianity & Islam_Anwar Shaikh
    22. Is the Bible Divine – Bradlaugh
    23. How Jesus Got a Life – Frank Zindler
    24. FORGERY IN CHRISTIANITY – JOSEPH WHELESS
    25. Did Jesus Even Exist? – Frank Zindler
    26. CRIMES OF CHRISTIANITY – G. W. FOOTE & J. M. WHEELER
    27. Christianity Unveiled – Nicholas Boulanger
    28. Bible – A Dangerous Moral Guide – Marshall J Gauvin
    29. THE AGE OF REASON – Thomas Paine (A MUST READ)

    NOTE:- All these authors have seen Christianity very closely.

    — Rajeshkumar Arya

  4. Rajeshkumar Arya

    Dear Aryas,
    These Christians are in the habit of unjustly maligning Hinduism. They do not know how to become honest critic.
    Whenever a Christian cunningly tries to malign Aryas and Aryan literature, all you have to do is to tell him to read ROBERT G INGERSOLL. If that Christian knows RGI, he will soon take to his heels; if he is really in search of truth and reads RGI, he will surely say bye bye to Christianity.

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