आर्यावीरो ने जब वैदिक साम्राज्य बनाया था……


आर्यावीरो ने जब वैदिक साम्राज्य बनाया था……

आर्यावीरो ने जब वैदिक साम्राज्य बनाया था
अनार्यों के हृदय में खौफ समाया था |
आर्यो के शौर्य से ही विश्व सुरक्षित हो पाया था
सुख समृद्धि शान्ति में जन-२ आनंदित हो पाया था |
रावण जैसे असुर ने जब सर उठाया था
राम नाम के आर्यवीर ने उसका शीश गिराया था |
कंस नाम के दुष्ट ने जब अनार्यत्व दिखाया था
कृष्ण नाम के आर्य योगी ने उसका अहंकार गिराया था |
अलेक्षेन्द्र भी आर्यवर्त आ के आके घबराया था
 ‘आचार्य चाणक्य’ का नाम सुन भाग अपने प्राण बचाया था |
अकबर नाम के धूर्त ने जब आर्यो से आँख मिलाया था
प्रताप नाम के आर्यवीर ने मुगलो की सेना को दहलाया था |
औरंगजेब नाम के राक्षस ने जब अत्याचार बढ़ाया था
आर्यवीर शिवा ने उसको पाताल दिखाया था |
जब अज्ञानता का बादल आर्यावर्त पर छाया था
तब वेदों के अज्ञान को दूर करने महर्षि दयानंद आया था |
जब पश्चिम से गोरो का दल आर्यावर्त आया था
राम प्रसाद बिस्मिल नाम के अर्यावीर ने उनको उनका स्थान बताया था |
अब आर्यवीर बनने की हमारी बारी हैं
राष्ट्र को आर्य बनाने की हमारी जिम्मेदारी हैं |
अब भगवे झंडे को विश्व राष्ट्र में लहराने की तैयारी हैं
अब पुनः वैदिक साम्राज्य खड़ा करने की हमारी बारी हैं |
Posted by Ved Arya
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Posted on December 27, 2011, in poems. Bookmark the permalink. 10 Comments.

  1. नमस्ते जी, बहुत बढियाँ है यह कविता ।
    कवि जी, क्या इस कविता में २ सुधार हो सकते है?

    कंश नाम के दुष्ट ने जब अनार्यत्व दिखाया था
    कृष्ण नाम के आर्य योगी ने उसका अहंकार गिराया था |

    सुधारः – यहाँ ‘कंश’ के स्थान पर “कंस” होना चाहिये ।

    अल्क्षेमेंद्र भी आर्यवर्त आ के आके घबराया था
    दक्षिण से भाग के अपने प्राण बचाया था |

    सुधारः – १. यहाँ ‘अल्क्षेमेंद्र’ के स्थान पर ‘अलेक्षेन्द्र’ होना चाहिये । और २. ‘दक्षिण’ के स्थान पर सीधा ‘आचार्य चाणक्य’ का नाम लिखे तो और एक आर्यवीर का नाम होगा ।

    धन्यवाद ….

  2. Excellent Motivating Poem

  3. अच्छी प्रस्तुति.

  4. नमस्ते जी कवि वेद आर्य जी, बहुत बढियां …
    एक सुधार अपेक्षित है ==राम प्रसाद बिस्मिल नाम के अर्यावीर
    आर्यवीर होना चाहिए …
    धन्यवाद

  5. कविता में “आर्यावीर” शब्द के स्थान पर “आर्यवीर” अधिक संगत लगता है । व्याकरण के दृष्टि से आप का क्या मन्तव्य है?

  6. A really good poem.
    But can you explain how to do that? Please enlighten asap.
    There are many waahaabis who are daily doing something to refute Agniveer. Even government is against Aryans. So, what is the solution to all this??

    Please provide some practical response which can be done to save Dharma.

  7. नमस्ते जी, यहाँ एक चर्चा है जो आप के प्रश्न का कुछ अंश में समाधान कर सकती है, ऐसा मेरा मानना है । इस पर विचार करे …

    ========================

    Devang Patel
    स्वामीजी , नमस्ते.
    देश में फैली अव्यवस्था से दुःख होता है. सभी क्षेत्रो में अव्यवस्था है. इसमें सुधार लाने के लिए हमें क्या-क्या करना चाहिए.
    LikeUnlike · · January 18 at 9:57pm near Ahmedabad, Gujarat ·

    स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक :: श्री देवांग पटेल जी, आप भारत के प्रधान मंत्री नहीं हैं, कोई केंद्रीय मंत्री भी नहीं हैं, कोई अन्य उच्च पद पर प्रतिष्ठित प्रशासनिक अधिकारी भी नहीं हैं. और न ही आप कोई बड़े प्रसिद्ध धार्मिक उपदेशक हैं. ये सब लोग भी देश की स्थिति सुधार नहीं पा… रहे हैं, या सुधारना नहीं चाहते हैं. परिवर्तन या तो सत्ता पर आसीन व्यक्ति कर सकता है या कोई धार्मिक उपदेशक कर सकता है जिसके पीछे बहुत सी जनता हो. परन्तु ये दोनों ही प्रकार के लोग आजकल स्वार्थ और अविद्या में फंसे हुए हैं. इसलिए “बहुत जल्दी से कोई बड़ा परिवर्तन / सुधार देश में होगा,” ऐसा दीखता नहीं है. इस सत्य को समझें, और व्यर्थ में दुखी न हों. तो फिर करें क्या ? इतना करें, कि स्वयं को भ्रष्टाचार से बचा कर रखें. आज तो व्यक्ति अपने आपको भ्रष्टाचार =(झूठ, छल, कपट, अन्याय आदि दुष्कर्मों ) से बचा कर रख ले, यही बहुत बड़ी बात है. तो आप स्वयं को इस भ्रष्टाचार से बचा कर रखें, और यथाशक्ति अपने मित्रों , साथियों को भी भ्रष्टाचार से बचने के लिए प्रेरित करें. यदि वे सुधार की तरफ चलते हैं, तो ठीक है, उनके लिए यथाशक्ति प्रयत्न करें, अन्यथा उन्हें छोड़ दें, अपना ध्यान पूरा रखें. यही बहुत है.See More
    January 19 at 6:56am · UnlikeLike · 10.

    • माननीय राजेश जी,

      नमस्कार
      आपने सत्य कहा – स्वयं बचो और दूसरो को भी गलत मार्ग से दूर करो।
      कृपया नीचे लिखित See more वाला सन्दर्भ प्रदान करे।
      धन्यवाद ॥

  8. GREAT POEM

  9. नमस्ते जी, वह फेस बुक से गलती से आया है । उसके बाद लेख नहीं है । कृपया स्वामी विवेकानन्द जी परिव्राजक जी के फेसबुक का पन्‍ना यहां देखिये … https://www.facebook.com/swavivekanand

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