Vedic God


 

 

ओ3म् अग्न आ याहि वीतये ग्रृणानो हव्य दातये | नि होता सत्सि बर्हिषि || साम 1

 

|| प्रभु हे ज्योतिरूप। मेरे अन्तर मे दिव्य ज्योति फैलाओ |

कर्मयोग के तत्व लखा कर नर तन सफल कराओ || …

प्रभु मेरे प्यारे आ जाओ, गीत स्तुतियों में रम जाओ |

यह ह्रृदय तुम्हारा मन्दिर है, प्रभु इसमें आकर बस जाओ ||

प्रभु गीत स्तुति श्रवण करो, यह सफल सुजीवन हवन करो,

मेरी दु:ख पीडा हरने को हे ईश्वर तुम आगमन करो |

हर हव्य भोग के दाता हो, निज हव्य हमें भी दे जाओ |

यह ह्रदय तुम्हारा मन्दिर है, प्रभु इसमें आकर बस जाओ||

प्रभु वसुधा के ओर छोर से, इस जीवन के सभी ओर से,

प्रभु आओ संताप मिटाओ, अपनी सुखदा कृपा को से |

हो भक्ति मगन वन्दना करूं, प्रार्थना दया कर सुन जाओ|

यह ह्रदय तुम्हारा मन्दिर है, प्रभु इसमें आकर बस जाओ||

प्रभु तुम्हीं हमारे होता हो, कामना पूर्ति के स्त्रोता हो,

मम ह्रदय यज्ञ का कुन्ड बना, गीत तुम्हीं, तुम ही श्रोता हो|

मम ह्रदय यज्ञ का मन्दिर है, प्रभु आहुति लेकर रम जाओ|

यह ह्रदय तुम्हारा मन्दिर है, प्रभु इसमें आकर बस जाओ||

 

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Posted on February 16, 2012, in poems. Bookmark the permalink. Leave a comment.

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