राजेश्वरी वीरांगना वेलुनाचियार


डॉ विवेक आर्य

मद्रास प्रान्त (अब तमिलनाडू) में मारवाड़ों की राजधानी शिवगंगा के राजा मुथु बटुकनाथ देवार ने अंग्रेजों को चुनोती दे रखी थी. कूटनीति में कुशल अंग्रेजों ने उनके क्षेत्र के कुख्यात डाकू कुट्टू की पीठ ठोककर बटुकनाथ को चुनोती दे रखी थी. अंग्रेजों की मदद से कुट्टू राजा के हाथों से बचता जा रहा था. कुट्टू ने राजा को चुनोती देते हुए यह घोषणा कर दी थी की एक दिन राजमहल में आकर न केवल राजमुद्रिका को चुरा लूँगा अपितु राजा की प्रेयसी वेलु को भी चुरा कर ले जाऊंगा. उसके उत्तर में बटुकनाथ ने भी घोषणा कर रखी थी की शिवगंगा के महल में ही कुट्टू की समाधी बनेगी. एक अर्धरात्रि को कुट्टू महल में घुस कर राजकोष से राजमुद्रिका ले उड़ा और वेलु के कक्ष में जाकर उसके समक्ष हँसते हुए बोला – “मुझे पहचानती हो सुन्दरी “. वेलु घबरायी नहीं अपितु घृणा से बोली खूब पहचानती हूँ तुम्हे देशद्रोही. दस्यु ने क्रोध में कहाँ “दुष्ट सुन्दरी, इस मुद्रिका की तरह तेरा भी अपहरण कर ले जायूँगा “. वेलु ने कहाँ करके देखों मेरी कमर में भी तलवार हैं ,देखती हूँ तू मेरा अपहरण करता हैं या मैं तेरे रक्त से खेलती हूँ. कुट्टू ने बिजली की तेजी से वेलु को पकड़ कर बांध दिया उसने वेलु को तलवार निकालने का मौका तक न दिया. उसे घोड़े पर लाद कर तूफानी चाल से भाग निकला.जब वेलु को होश आया तो उसने देखा की कुट्टू अपनी धुन में चले जा रहा हैं. कुछ समय पश्चात कुट्टू की पकड़ जैसे ही थोड़ी ढीली पड़ी तो उसने कुट्टू की कमर से लटकी तलवार निकाली और कुट्टू के सीने में उतार दी. कुट्टू का वही काम तमाम हो गया. वेलु उसी घोड़े पर सवार होकर राजप्रसाद में लौट आयी. वीरांगना वेलु की विजय पर सभी ने उनका स्वागत किया और बटुकनाथ के साथ उनका विवाह संपन्न हुआ. अंग्रेज सरकार ने जब कुट्टू के मारे जाने और बटुकनाथ और वेलु के विवाह के बारे में सुना तो बदला लेने के लिए हमला कर दिया. बटुकनाथ और वेलु ने जब यह समाचार सुना तो खुशी से झूम उठे. अपने दो चतुर सामंतों को बुलाकर जैक्सन और बोंजोर नमक अंग्रेज अधिकारीयों को सबक सिखाने के लिए भेज दिया. कंपनी सेना कूच करती हुई बेगई नदी के किनारे पहुँची तो सामंतों के सिखाये चतुर मल्लाहों ने आगे बढ़कर उनका स्वागत किया और कंपनी के लश्कर को नदी पार उतारने का ठेका ले लिया. अपने अस्त्र शस्त्र सहित फिरंगी सेना दो बड़ी नावों पर सवार हुई. मझधार में जाकर दोनों मल्लाहों ने एक दुसरे को इशारा कर नावों को मझधार में फँसा कर एक दुसरे से टकरा कर डुबो दिया. अंग्रेजों की सेना का वही काम तमाम हो गया.इस दुर्घटना की सूचना पाकर कंपनी सरकार तिलमिला उठी और मद्रास से नई कुमुक मंगाई गई. देशभक्त मारवाड़ों और कंपनी सेना में मुठभेड़े होने लगी. एक रात को बटुकनाथ शिकार पर गए हुए थे तो कंपनी सेना ने शिवगंगा को चारों तरफ से घेर लिया. सिंह की गुफा पर गीदरों से धावा बोल दिया पर सिंहनी अब भी गुफा में थी. वेलु अपनी फौज को लेकर कंपनी सेना पर टूट पड़ी और विजय श्री प्राप्त करी. इस प्रकार अनेक प्रयासों के बाद भी कंपनी सेना लगातार हारती रही. आखिर में देशद्रोही कुट्टू के भाई ने पैसों के लालच में गढ़ का गुप्त मार्ग बता दिया. रात के अन्धेरें में अंग्रेजों ने हमला कर दिया. वेलु और बटुकनाथ मुट्ठी भर सैनिकों के साथ संघर्ष करते रहे. बटुकनाथ का एक अंग कट जाने पर भी वह अंत तक लड़ता रहा. फिर उसकी आज्ञा से उसके दीवान ने उसका सर काट दिया. परन्तु वेलु ने हार नहीं मानी. अपने पति का सर हाथ में लेकर वह चंडी की भांति शत्रु सेना पर टूट पड़ी. उसके एक ही वार में जैक्सन का दाहिना हाथ उड़ गया. शत्रु का घेरा तोड़कर वह डिंडीगल की ओर चल पड़ी. वहाँ के राजा टीपू सुलतान से मदद लेकर करीब दो साल बाद वेलु ने क्रिसमस की रात को शराब के नशे में डूबे हुए सैनिकों पर धावा बोल दिया. अंग्रेज सेना ने हथियार डाल दिए. शिवगंगा पर राजघराने की विजय का सेहरा तीसरी बार वेलु के सर पर बंधा. अगले दिन जब वेलु के राज्य अभिषेक होने वाला था तो दीवान ने पाया की वेलु वीर बटुकनाथ की समाधी पर सर टेके बैठी हैं और उसके प्राण उड़ चुके थे.

१८५७ के प्रथम संगठित मुक्ति संघर्ष से पूर्व स्वदेश के लिए अपने प्राणों की बाजी लगाने वाली अल्पज्ञात राजेश्वरी वीरांगना वेलुनाचियार का संघर्ष आज भी हमें देश भक्ति की प्रेरणा देता हैं.

 (tagged- history 1857 india freedom struggle velu batuknath devar shivganga tipu sultan british Rani Velu Nachiyar Tamil இராணி வேலு நாச்சியார்) )

Advertisements

About Fan of Agniveer

I am a fan of Agniveer

Posted on March 12, 2012, in Legends. Bookmark the permalink. Leave a comment.

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: