धर्मो रक्षति रक्षित: के अर्थ को अब पहचानो तुम


जब याद गोधरा आता है आँखों में आँसू आते हैं,

कश्मीरी पंडितों की पीड़ा कुछ हिंदू भूल क्यों जाते हैं।

हर बार विधर्मी शैतानों ने धर्म पर हैं प्रहार किये,

हर बार सहिष्णू बन कर हमने जाने कितने कष्ट सहे। …

… अब और नहीं चुप रहना है अब और नहीं कुछ सहना है,

जैसा आचरण करेगा जो, वो सूद समेत दे देना है।

क्या भूल गये राजा प्रथ्वी ने गौरी को क्षमा-दान दीया,

और बदले में उसने राजा की आँखों को निकाल लीया।

ये वंश वही है बाबर का जो राम का मंदिर गिरा गया,

और पावन सरयू धरती पर बाबरी के पाप को सजा गया।

अकबर को जो कहते महान क्या उन्हें सत्य का ज्ञान नहीं,

या उनके हृदय में जौहर हुई माताओं के लिए सम्मान नहीं।

औरंगज़ेब की क्रूरता भी क्या याद पुन: दिलवाऊँ मैं,

टूटे जनेऊ और मिटे तिलक के दर्शन पुन: कराऊँ मैं।

तुम भाई कहो उनको लेकिन तुमको वो काफ़िर मानेंगे,

और जन्नत जाने की खातिर वो शीश तुम्हारा उतारेंगे।

धर्मो रक्षति रक्षित: के अर्थ को अब पहचानो तुम,

धर्म बस एक ‘सनातन’ है, कोई मिथ्या-भ्रम मत पालो तुम।

Advertisements

About Fan of Agniveer

I am a fan of Agniveer

Posted on June 12, 2012, in poems. Bookmark the permalink. 4 Comments.

  1. shivani kaushal

    SNATAN DHARMA sarv dharma sadbhav ka rakshak hai!!!!!!!!! in ktu shabdon ka nahin

  2. jugal kishore somani

    जो धर्म की रक्षा करता है : धर्म उसकी रक्षा करता है
    यह तो सनातन सत्य है कि जो धर्म की रक्षा करता है : धर्म उसकी रक्षा करता है .एक उदाहरण प्रस्तुत करना चाहूँगा : सब जानते हैं कि आज भारत में पानी की विकट समस्या है …. यह क्यों हुई ? हमने पानी का बुरी तरह से दुरुपयोग किया , वर्षा के पानी का बचाव नहीं किया – यों ही बह जाने दिया , शहरों – गांवो की गलियों में सडकों का जाल बिछा कर हमने उन्नति का परिचय दिया , विलायती बबूल – यूकेलिप्टस जैसे पेड़ों को पनपाया …….. लम्बी फेहरिस्त है . नतीजा पानी की कमी हो गयी . कुए सूख गए – पानी धरती में नीचे उतर गया . अब हमें लगा कि ये तो गलत हो गया – सुधार शुरू किया – वर्षा के पानी को ट्यूबवेलों द्वारा सीधे धरती को पहुंचाने लगे , घरों में पानी ( बरखा के पानी ) के लिए अंडर ग्राउंड टैंक बनाए जाने लगे , नदियों को जोड़ने की स्कीमें बनाने की लगन लगी…..
    ……..मेरा उदाहरण समझ गए होंगे ……. इन पाखंडियों ने धर्म का बहुत उपहास उड़ा लिया – अपने आप को धर्म निरपेक्ष बनाने का ढोंग कर लिया – गया इनका समय …… अब पुनः धर्म की पताका ईमानदारी से लहराएगी . तभी सचमुच कहा जाएगा कि जो धर्म की रक्षा करता है : धर्म उसकी रक्षा करता है………….

  3. Dhanyavad

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: