प्रणाम


रचियता- श्री उत्तम चंद शरर जी

ओ तुम हिमालय श्रृंग तुल्य उज्जवल महान,

गंभीर पवन पावन चरित्र गंगा समान

ओ ब्रहमचर्य साकार दिव्या जीवन अनुरूप,

पाखंड दंभ के लिए उग्र विद्रोह रूप

ओ पयोदधि से शांत, बिजलिनी हो विहल,

ओ प्रखर तेज़ में सूर्य, चंद्रमा से शीतल

निर्भीक तपास्थ, परिव्राट कोपीन धारी,

आचार्य ऋषिवर दयानंद, ओ ब्रहमचारी

ओ जग हित जीवन अर्पित करने वाले,

विष पी पी कर भी पर पीड़ा हरने वाले

ओ तेजस्वी, ओ क्रांत दशी, ओ सत्य काम,

युग पुरुष हमारा युगों युगों तक प्रणाम

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Posted on November 7, 2012, in poems. Bookmark the permalink. 2 Comments.

  1. vry nyc

  2. Fantastic song Vivekji.

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