शम्बूक वध का सत्य


Shambuk in Tapasya and Shri Ram approaching him with Sword in hand

Shambuk in Tapasya and Shri Ram approaching him with Sword in hand

डॉ विवेक आर्य

मर्यादापुरुषोतम श्री रामचंद्र जी महाराज के जीवन को सदियों से आदर्श और पवित्र माना जाता हैं। कुछ विधर्मी और नास्तिकों द्वारा श्री रामचन्द्र जी महाराज पर शम्बूक नामक एक शुद्र का हत्यारा होने का आक्षेप लगाया जाता हैं।

सत्य वही हैं जो तर्क शास्त्र की कसौटी पर खरा उतरे। हम यहाँ तर्कों से शम्बूक वध की कथा की परीक्षा करके यह निर्धारित करेगे की सत्य क्या हैं।

सर्वप्रथम शम्बूक कथा का वर्णन वाल्मीकि रामायण में उत्तर कांड के 73-76 सर्ग में मिलता हैं।

शम्बूक वध की कथा इस प्रकार हैं-

एक दिन एक ब्राह्मण का इकलौता बेटा मर गया। उस ब्राह्मण ने लड़के के शव को लाकर राजद्वार पर डाल दिया और विलाप करने लगा। उसका आरोप था की बालक की अकाल मृत्यु का कारण राज का कोई दुष्कृत्य हैं। ऋषि- मुनियों की परिषद् ने इस पर विचार करके निर्णय दिया की राज्य में कहीं कोई अनधिकारी तप कर रहा हैं। रामचंद्र जी ने इस विषय पर विचार करने के लिए मंत्रियों को बुलाया। नारद जी ने उस सभा में कहा- राजन! द्वापर में भी शुद्र का तप में प्रवत होना महान अधर्म हैं (फिर त्रेता में तो उसके तप में प्रवत होने का प्रश्न ही नहीं उठता?)। निश्चय ही आपके राज्य की सीमा में कोई खोटी बुद्धिवाला शुद्र तपस्या कर रहा हैं। उसी के कारण बालक की मृत्यु हुई हैं। अत: आप अपने राज्य में खोज कीजिये और जहाँ कोई दुष्ट कर्म होता दिखाई दे वहाँ उसे रोकने का यतन कीजिये। यह सुनते ही रामचन्द्र जी पुष्पक विमान पर सवार होकर शुम्बुक की खोज में निकल पड़े और दक्षिण दिशा में शैवल पर्वत के उत्तर भाग में एक सरोवर पर तपस्या करते हुए एक तपस्वी मिल गया जो पेड़ से उल्टा लटक कर तपस्या कर रहा था।

उसे देखकर श्री रघुनाथ जी उग्र तप करते हुए उस तपस्वी के पास जाकर बोले- “उत्तम तप का पालन करते हए तापस! तुम धन्य हो। तपस्या में बड़े- चढ़े , सुदृढ़ पराक्रमी पुरुष! तुम किस जाति में उत्पन्न हुए हो? मैं दशरथ कुमार राम तुम्हारा परिचय जानने के लिए ये बातें पूछ रहा हूँ। तुम्हें किस वस्तु के पाने की इच्छा हैं? तपस्या द्वारा संतुष्ट हुए इष्टदेव से तुम कौन सा वर पाना चाहते हो- स्वर्ग या कोई दूसरी वस्तु? कौन सा ऐसा पदार्थ हैं जिसे पाने के लिए तुम ऐसी कठोर तपस्या कर रहे हो जो दूसरों के लिए दुर्लभ हैं?

तापस! जिस वस्तु के लिए तुम तपस्या में लगे हो, उसे मैं सुनना चाहता हूँ। इसके सिवा यह भी बताओ की तुम ब्राह्मण हो या अजेय क्षत्रिय? तीसरे वर्ण के वैश्य हो या शुद्र हो?”

कलेश रहित कर्म करने वाले भगवान् राम का यह वचन सुनकर नीचे मस्तक करके लटका हुआ वह तपस्वी बोला – हे श्री राम ! मैं झूठ नहीं बोलूँगा। देव लोक को पाने की इच्छा से ही तपस्या में लगा हूँ। मुझे शुद्र जानिए। मेरा नाम शम्बूक हैं।

वह इस प्रकार कह ही रहा था की रामचन्द्र जी ने म्यान से चमचमाती तलवार निकाली और उसका सर काटकर फेंक दिया।

शम्बूक वध की कथा की तर्क से परीक्षा

इस कथा को पढ़कर मन में यह प्रश्न उठता हैं की

क्या किसी भी शुद्र के लिए तपस्या धर्म शास्त्रों में वर्जित हैं?

क्या किसी शुद्र के तपस्या करने से किसी ब्राह्मण के बालक की मृत्यु हो सकती हैं?

क्या श्री रामचन्द्र जी महाराज शूद्रों से भेदभाव करते थे?

इस प्रश्न का उत्तर वेद, रामायण ,महाभारत और उपनिषदों में अत्यंत प्रेरणा दायक रूप से दिया गया हैं।

वेदों में शूद्रों के विषय में कथन

1. तपसे शुद्रम- यजुर्वेद 30/5

अर्थात- बहुत परिश्रमी ,कठिन कार्य करने वाला ,साहसी और परम उद्योगों अर्थात तप को करने वाले आदि पुरुष का नाम शुद्र हैं।

2. नमो निशादेभ्य – यजुर्वेद 16/27

अर्थात- शिल्प-कारीगरी विद्या से युक्त जो परिश्रमी जन (शुद्र/निषाद) हैं उनको नमस्कार अर्थात उनका सत्कार करे।

3. वारिवस्कृतायौषधिनाम पतये नमो- यजुर्वेद 16/19

अर्थात- वारिवस्कृताय अर्थात सेवन करने हारे भृत्य का (नम) सत्कार करो।

4. रुचं शुद्रेषु- यजुर्वेद 18/48

अर्थात- जैसे ईश्वर ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शुद्र से एक समान प्रीति करता हैं वैसे ही विद्वान लोग भी ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शुद्र से एक समान प्रीति करे।

5. पञ्च जना मम – ऋग्वेद

अर्थात पांचों के मनुष्य (ब्राह्मण , क्षत्रिय, वैश्य, शुद्र एवं अतिशूद्र निषाद) मेरे यज्ञ को प्रीतिपूर्वक सेवें। पृथ्वी पर जितने मनुष्य हैं वे सब ही यज्ञ करें।

इसी प्रकार के अनेक प्रमाण शुद्र के तप करने के, सत्कार करने के, यज्ञ करने के वेदों में मिलते हैं।

वाल्मीकि रामायण से शुद्र के उपासना से महान बनने के प्रमाण

मुनि वाल्मीकि जी कहते हैं की इस रामायण के पढ़ने से ()स्वाध्याय से ) ब्राह्मण बड़ा सुवक्ता ऋषि होगा, क्षत्रिय भूपति होगा, वैश्य अच्छा लाभ प्राप्त करेगा और शुद्र महान होगा। रामायण में चारों वर्णों के समान अधिकार देखते हैं देखते हैं। -सन्दर्भ- प्रथम अध्याय अंतिम श्लोक

इसके अतिरिक्त अयोध्या कांड अध्याय 63 श्लोक 50-51 तथा अध्याय 64 श्लोक 32-33 में रामायण को श्रवण करने का वैश्यों और शूद्रों दोनों के समान अधिकार का वर्णन हैं।

महाभारत से शुद्र के उपासना से महान बनने के प्रमाण

श्री कृष्ण जी कहते हैं –

हे पार्थ ! जो पापयोनि स्त्रिया , वैश्य और शुद्र हैं यह भी मेरी उपासना कर परमगति को प्राप्त होते हैं। गीता 9/32

उपनिषद् से शुद्र के उपासना से महान बनने के प्रमाण

यह शुद्र वर्ण पूषण अर्थात पोषण करने वाला हैं और साक्षात् इस पृथ्वी के समान हैं क्यूंकि जैसे यह पृथ्वी सबका भरण -पोषण करती हैं वैसे शुद्र भी सबका भरण-पोषण करता हैं। सन्दर्भ- बृहदारण्यक उपनिषद् 1/4/13

व्यक्ति गुणों से शुद्र अथवा ब्राह्मण होता हैं नाकि जन्म गृह से।

सत्यकाम जाबाल जब गौतम गोत्री हारिद्रुमत मुनि के पास शिक्षार्थी होकर पहुँचा तो मुनि ने उसका गोत्र पूछा। उन्होंने उत्तर दिया था की युवास्था में मैं अनेक व्यक्तियों की सेवा करती रही। उसी समय तेरा जन्म हुआ, इसलिए मैं नहीं जानती की तेरा गोत्र क्या हैं। मेरा नाम सत्यकाम हैं। इस पर मुनि ने कहा- जो ब्राह्मण न हो वह ऐसी सत्य बात नहीं कर सकता। सन्दर्भ- छान्दोग्य उपनिषद् 3/4

महाभारत में यक्ष -युधिष्ठिर संवाद 313/108-109 में युधिष्ठिर के अनुसार व्यक्ति कूल, स्वाध्याय व ज्ञान से द्विज नहीं बनता अपितु केवल आचरण से बनता हैं।

कर्ण ने सूत पुत्र होने के कारण स्वयंवर में अयोग्य ठह राये जाने पर कहा था- जन्म देना तो ईश्वर अधीन हैं, परन्तु पुरुषार्थ के द्वारा कुछ का कुछ बन जाना मनुष्य के वश में हैं।

आपस्तम्ब धर्म सूत्र 2/5/11/10-11 – जिस प्रकार धर्म आचरण से निकृष्ट वर्ण अपने से उत्तम उत्तम वर्ण को प्राप्त होता हैं जिसके वह योग्य हो। इसी प्रकार अधर्म आचरण से उत्तम वर्ण वाला मनुष्य अपने से नीचे वर्ण को प्राप्त होता हैं।

जो शुद्र कूल में उत्पन्न होके ब्राह्मण के गुण -कर्म- स्वभाव वाला हो वह ब्राह्मण बन जाता हैं उसी प्रकार ब्राह्मण कूल में उत्पन्न होकर भी जिसके गुण-कर्म-स्वाभाव शुद्र के सदृश हों वह शुद्र हो जाता हैं- मनु 10/65

चारों वेदों का विद्वान , किन्तु चरित्रहीन ब्राह्मण शुद्र से निकृष्ट होता हैं, अग्निहोत्र करने वाला जितेन्द्रिय ही ब्राह्मण कहलाता हैं- महाभारत वन पर्व 313/111

ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शुद्र सभी तपस्या के द्वारा स्वर्ग प्राप्त करते हैं।महाभारत अनुगीता पर्व 91/37

सत्य,दान, क्षमा, शील अनृशंसता, तप और दया जिसमें हो वह ब्राह्मण हैं और जिसमें यह न हों वह शुद्र होता हैं। वन पर्व 180/21-26

श्री रामचन्द्र जी महाराज का चरित्र

वाल्मीकि रामायण में श्री राम चन्द्र जी महाराज द्वारा वनवास काल में निषाद राज द्वारा लाये गए भोजन को ग्रहण करना (बाल कांड 1/37-40) एवं शबर (कोल/भील) जाति की शबरी से बेर खाना (अरण्यक कांड 74/7) यह सिद्ध करता हैं की शुद्र वर्ण से उस काल में कोई भेद भाव नहीं करता था।

श्री रामचंद्र जी महाराज वन में शबरी से मिलने गए। शबरी के विषय में वाल्मीकि मुनि लिखते हैं की वह शबरी सिद्ध जनों से सम्मानित तपस्वनी थी। अरण्यक 74/10

इससे यह सिद्ध होता हैं की शुद्र को रामायण काल में तपस्या करने पर किसी भी प्रकार की कोई रोक नहीं थी।

नारद मुनि वाल्मीकि रामायण (बाल कांड 1/16) में लिखते हैं राम श्रेष्ठ, सबके साथ समान व्यवहार करने वाले और सदा प्रिय दृष्टी वाले हैं।

अब पाठक गन स्वयं विचार करे की श्री राम जी कैसे तपस्या में लीन किसी शुद्र कूल में उत्पन्न हुए शम्बूक की हत्या कैसे कर सकते हैं?

जब वेद , रामायण, महाभारत, उपनिषद्, गीता आदि सभी धर्म शास्त्र शुद्र को तपस्या करने, विद्या ग्रहण से एवं आचरण से ब्राह्मण बनने, समान व्यवहार करने का सन्देश देते हैं तो यह वेद विरोधी कथन तर्क शास्त्र की कसौटी पर असत्य सिद्ध होता हैं।

नारद मुनि का कथन के द्वापर युग में शुद्र का तप करना वर्जित हैं असत्य कथन मात्र हैं।

श्री राम का पुष्पक विमान लेकर शम्बूक को खोजना एक और असत्य कथन हैं क्यूंकि पुष्पक विमान तो श्री राम जी ने अयोध्या वापिस आते ही उसके असली स्वामी कुबेर को लौटा दिया था-सन्दर्भ- युद्ध कांड 127/62

जिस प्रकार किसी भी कर्म को करने से कर्म करने वाले व्यक्ति को ही उसका फल मिलता हैं उसी किसी भी व्यक्ति के तप करने से उस तप का फल उस तप कप करने वाले dव्यक्ति मात्र को मिलेगा इसलिए यह कथन की शम्बूक के तप से ब्राह्मण पुत्र का देहांत हो गया असत्य कथन मात्र हैं।

सत्य यह हैं की मध्य काल में जब वेद विद्या का लोप होने लगा था, उस काल में ब्राह्मण व्यक्ति अपने गुणों से नहीं अपितु अपने जन्म से समझा जाने लगा था, उस काल में जब शुद्र को नीचा समझा जाने लगा था, उस काल में जब नारी को नरक का द्वार समझा जाने लगा था, उस काल में मनु स्मृति में भी वेद विरोधी और जातिवाद का पोषण करने वाले श्लोकों को मिला दिया गया था,उस काल में वाल्मीकि रामायण में भी अशुद्ध पाठ को मिला दिया गया था जिसका नाम उत्तर कांड हैं।

इस प्रकार के असत्य के प्रचार से न केवल अवैदिक विचाधारा को बढावा मिला अपितु श्री राम को जाति विरोधी कहकर कुछ अज्ञानी लोग अपने स्वार्थ की सिद्धि के लिए हिन्दू जाति की बड़ी संख्या को विधर्मी अथवा नास्तिक बनाने में सफल हुए हैं।

इसलिए सत्य के ग्रहण और असत्य के त्याग में सदा तत्पर रहते हुए हमें श्री रामचंद्र जी महाराज के प्रति जो अन्याय करने का विष वमन किया जाता हैं उसका प्रतिकार करना चाहिए तभी राम राज्य को सार्थक और सिद्ध किया जा सकेगा।

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Posted on March 3, 2013, in History. Bookmark the permalink. 56 Comments.

  1. Dr. Kuvempu[[ K,V.Puttappa] is an acclaimed Kannada Scholar. He wrote “Ramayana Darshanam” for which he was awarded “Jnanapeeth” Dr Kuvempu wrote “Shudra Tapasvi” play where the above story is tackled. However, contrary to the popular belief, Ram here does not kill Shambuk, On the other hand he praises him for his tapasvi qualities.Further, he admonishes Brahmins and tells them not to prevent Shudras from doing penanace. On the whole the play has done justice to the character of Ram.
    The play was very popular during 1960s-70s and used to played in all College functions. Now the present generation dont know much about the play. However, Dalits of radical variety continues to harp on Shambuk episode.
    The remedy for this problem is cleanse Ramayan of all spurious additives. The late Jagadeeshwaranand Saraswathi did yeoman service in bringing out authentic ramayan. But this is not popular and confined to Aryasamaj circles. Efforts must be made to see that this book or the prose version of Ramayan free from interpolations are brought out so that coming generations would know the truth

  2. shambuk vadh ka kaaran rajkaramchari ka kartvy paalan main kothi baratana tha | sambuk kyonki rajy ki safai vyavstha ka uttardayi tha usne apne kartvy paalan ke bajay puja path karna suru kar diya jisse ram ji ke rajy main bimari faili jiska shikar ek yuva hua | karmchari dwara uttardyitv na nirvahan nahi karna dandniy apradh hai isi liye RAM ji ne use mrityu dand diya agar sudr ki tapsya manah thi to bhala ramayan ke rachiyta VALMIKI or mahabharat ke rachiyta VEDVYAS DVPAAYAN KRISHAN dono hi janm se SUDR hai .\ HAR HAR MAHADEV

    • Anil Goyal ji
      kripa praman dekar apne vichar rakhe. valmiki ramayan mein kahin par bhi aisa nahin likha hein ki shambuk safai karamchari tha. isliye apka kathan galat hein.

    • leuva Bhaskarkumar

      Thik se apne dharm ko padho dost vedvyas shudra nahi xatriya tha. Bhishma pita ka bhai tha…

      • Ved Vyas k pita rishi “parashar” or mata ” satyavati” jo ki ek matasya kanya yani k fisherwoman. However he was raised among fishermen so he was considered to be of their community.
        Or apki bat jese ” ulta chor kotwal ko daate”

    • suno bhaiya anil ji tod madoker bate dena or astay bolna aap logo ke khoon me he

    • anil goyal aap ko kuch bhi nai pata hai. app sirf bakwaas kar rahe hai aap vahi bol rahe hai jo aapne dusro k mhu se suna hai ek baar adhyan kar lijiye sb pata chal jaega aap ko dusro ka suna hua mat bole

    • ohh bhai aaj k time itni gandgi hai to aaj koi jb mar jata hai to tb kyo nhi hahakar krte or uss RAM ko tum log bhgwan mante ho or uppar se bolte ho k ram ne uski jaat puchi bhabwan kya kisi ki jaat puchte hai tum sabhi to chilla chilla k bolte ho jb apne parwachan sunane hote hai k bhagwan ne sabko ek sman bnaya hai sab fake hai tumhara RAM b fake hai

    • aap kehna chahte hain ki maatr shambuk hi poore rajya ki safai vyavastha dekh raha tha or koi us samay safai karmchari nahi tha…Pooja Paath karna itna hi galat bana diya gaya ki unhe mandiron me pravesh hi varjit ho gaya…

    • Abe o anil goyal kutte k bacche,, bhot dimag hai tere andar,, saale ab koi tjhe bimari hogi to kisi hospital me jaker uski jaati puch liyo pehle,, kahi vo choti jaati ka ho,,

    • महान दार्शनिक चार्वाक से लेकर सन्त शम्बूक जैसे महान लोगो को क्षत्रियो और ब्राह्मणों ने इसलिए मार दिया क्योंकि वे अपने शूद्र वर्ग के बच्चों को, महिलाओ को शिक्षित कर रहे थे।

      • @ sumedh ji 17 feb 2017 ki bat ekdam 100%satya hai ye arya log chahte the ki bharat me unka samrajya kabhi khatm na ho sabhi drte the ki shudra pd likh ke bagawat na karne lage bidroh na kar de lekin anyay hmesha to nhi chl sakta aakhir bhimji jesa shudra atishudra udhdharak ek mashiha bankar paida hua jisne ese modern bharat ki adharshila rakh di ki aage chalkr sabhi eksaman ho jayge aur mukhyadhara me jud jayge koi pichhda nhi rahega . Ab bharat rupi sarir ka har ang bharat ki tarakki me kadam milakar aage aa rha hai ab is sarir ko koi ang kamjor nhi pdne diya ja rha hai ab brahman khatriya baishya shudra atishudra sab ek sath modern bhat ka nirmad kr rhe hai We all love my india….

    • ashwani chandra

      To ram rajya mein sirf ek hi safai karmchari tha aur woh akela hi rajmahal aur ayodhya ki safai karta tha. Ram rajya mein dusra koi aadmi nahin mila jo safai ka kaam kar sake. Aur shambuk marne ke baad to ramji ne dura karmchari rakha hi hoga. Jaisa marne ke baad rakha to waise hi bina shambuk ka sar kaate rakh sakte the.

      This story if true sgows the level of castesism practiced in Ancient India.

  3. Anil Goyal
    what you say is totally absurd. Man has independence to change professions. Is it not? A pujari’s son becomes a politician and a dacoit queen becomes M.P. This is the fundamental right of every man and Vedas afford full opportunity to the person to blossom in the field he likes. Shambuk therefore had the freedom and he chose Tapasya. Anyway, this whole Shambuk episode is a figment of imagination not found in authentic Ramayan but added later by casteist forces.

  4. कठमुल्लों, विधर्मियों के झूठ का जबरदस्त भंडाफोड़…
    अवश्य जानिए…

    “प्रभु श्रीराम दलितनिन्दक या दलितों के कालजयी मसीहा….”

    http://www.voiceofaryas.com/refute/rama-sita-vanvaas-shambhuk-murder/

    जय जय श्री राम
    ॐ!

  5. रावण का वध करना कितना सही कितना गलत

    कुछ अज्ञानी लोग यह कहते देखे जाते हैं की प्रभु राम द्वारा रावण को मारना गलत था क्यूंकि रावण तो अपनी बहन शूर्पनखा का जो अपमान राम और लक्ष्मण ने किया था उसका बदला ले रहा था। रावण तो इस प्रकार से वीर कहलाया जायेगा जिसने अपनी बहन के लिए अपने प्राणों को आहुति दे दी।

    सर्वप्रथम तो रावण की बहन का चरित्र संदेह वाला हैं जो वन में किसी अन्जान विवाहित पुरुषों पर डोरे डालती हैं। ऐसा महिला को सभ्य समाज में चरित्रहीन ही कहाँ जायेगा।

    राम और लक्ष्मण आर्य राजकुमार थे जिनके लिये आर्य मर्यादा का पालन करना सर्वोपरि था इसलिए उन्होंने जब शूर्पनखा का आग्रह ठुकरा दिया तो शूर्पनखा ने उसे अपना अपमान समझा और प्रसिद्द हिंदी मुहावरा अपमान करने को नाक काटना भी कहते हैं।

    यह भी गलत प्रचारित कर दिया गया की शूर्पनखा की शारीरिक हानि लक्ष्मण द्वारा की गयी थी।

    शूर्पनखा राक्षसराज रावण की बहन होने के कारण अहंकारी और दंभी दोनों थी। उस किसी की भी न सुनने की आदत नहीं थी।\

    शूर्पनखा के बहकावे में आकार रावण ने सीता का अपहरण कर वेद विरुद्ध कार्य किया।

    एक और रावण द्वारा सीता का अपहरण करना दूसरी और वेदों का विद्वान होने हमें यह सन्देश देता हैं की केवल विद्वान होने से ही सब कुछ नहीं होता। उसके लिए आचरण होना भी अत्यंत आवश्यक हैं इसीलिए श्री राम द्वारा रावण वध यह सन्देश भी देता हैं की केवल शाब्दिक ज्ञान ही सब कुछ नहीं हैं आचरण सर्वोपरि हैं।

    हमारे इस कथन का समर्थन स्वयं महाभारत भी इस प्रकार से करती हैं।

    चारों वेदों का विद्वान , किन्तु चरित्रहीन ब्राह्मण शुद्र से निकृष्ट होता हैं, अग्निहोत्र करने वाला जितेन्द्रिय ही ब्राह्मण कहलाता हैं- महाभारत वन पर्व 313/111

    • नाक कटाना
      सूपनखा बहुत ही खूबसूरत थी़ रावण (ब्राहमण) की बहन थी़
      बनवास मे राम के साथ सीता थी जबकि लछ्मण अकेले
      सूपनखा को देखते ही उनमे ठाकुरों वाले गन्दे गुण जाग गये और सूपनखा की इज्जत लूट ली।

      रावण ब्राहमण था उसे बदले की भावना अच्छी लगी

    • dwapar yug me draupadi ke 5 pati the.. aaj ke sabhy samaj me 1 aurat ke 5 pati ho to kya pati ko dharmraaj kaha ja sakta hai lekin fir bhi yudhistar ko dharam raaj kaha jata hai kyun\

    • aap apne dharm ki kamiyo ko ujagar kijiye.jiske karan aaj puri dunia me tabahi machi hue hai.humare dharm me chahe wo brahman ho ya sudra sabko uske karmo se mapa gaya hai.or uske karmo ke hishab se damd dea jata hai.behtar yahi hoga ki aap apne dharmo ki buraeyo ke bare me logo ko bataeye.hum hamara dekh rahe hai.or samay ke hishab se sudhar kar rahe hai.

  6. sandeep bansal

    जब पूरा उत्तरकाण्ड ही मिलावट की देन है तो केवल शम्बूक वध पर सफाई देने का कोई औचित्य नहीं बनता सपष्ट सी बात है की जो राम शुद्र शबरी के झूठे बेर खा सकते हैं तो किसी तपस्वी को उसके शूद्र्प्न के कारन क्यूँ मारेंगे

    • संदीप बंसल जी

      सफाई कोई नहीं दे रहा। हम तो असत्य का खंडन और सत्य का मंडन कर रहे हैं।

    • leuva Bhaskarkumar

      Kyoki shabri sheva ka kam karti thi. Our shudra ka kam kewal seva karna he. Our shambuk ne to beahmano wala kam shuru kar diya tha. Ab tapsya se apna ekadhidhikar banaye eakhne ke liye bhrahmano dwara ram ke hatho shambuk ko marwa diya.

      • Achchha chaliye aap ye tark de sakte hai par aur puspak viman ka kya jo lauta diya gaya tha ya kuber ko de diya gaya tha

    • Kyoki shabri sheva ka kam karti thi. Our shudra ka kam kewal seva karna he. Our shambuk ne to beahmano wala kam shuru kar diya tha. Ab tapsya se apna ekadhidhikar banaye eakhne ke liye bhrahmano dwara ram ke hatho shambuk ko marwa diya. SMJHE BANSAL

    • Puri ramayan hi farzi hai, Aur Ram ej nirmal insaan tha. Jiski story Chatpati, Masaledaar bana kar Ramayan likhi, aur fir uski puja shuru ho gayi 3-4 Hazar saal baad. 2000 saal baad agar dekh sakte hai to to Modi ki bhi bhagwan bana kar puja hone lagegi

  7. कर्ण का उदहारण गलत है | महाभारत में कहीं नहीं लिखा कि द्रोपदी ने कहा कि मै सूत पुत्र से विवाह नहीं करूंगी

  8. Tathakathit Shri Krishna stri, vaisya aur shudra ko pap yoni me kaise batate h , zara ye bhi batlaiye.
    Sharm se kaho hum Hindu h

  9. bhagawan valmiki ji ki jai sabhiko jai valmiki ji sachai kitani bhi chhupa lo ya parda gero kabhi bhi nahi chheep sakti ok bhavadhs ya adharsh bharat ke gru o ko batahao news balo ke sth

  10. ESE NICH RAM KO PURUSHOTTAM KAHA JATA H…… SALA KUTTA SUAR KA BACHCHA RAAM…..

  11. डॉ पुष्पलता अधिवक्ता

    राम को मैं भी पूजती हूँ शबरी के बेर खाने के बाद भी वे शम्बूक वध इसलिए भी कर सकते हैं क्योंकि उन्होंने अग्नि परीक्षा के बाद भी पत्नी को गर्भवती पत्नी को वन में अप यश के डर से छुड़वा दिया वे सत्ता के लोभी नहीं थे मगर अपयश उन्हें मृत्यु से ज्यादा पीड़ादायक था ।उस समाज का शुद्र के प्रति नजरिया कैसा होगा जिसमें पूजा करने से कोई बालक मरेगा यह माना ।फिर बाल्मीकि रामायण में यह क्षेपक क्यों किसने कब जोड़ा इसका प्रमाण भी तो देना पड़ेगा ।जो अपने मासूम बच्चों की तरफ से लापरवाह गैर जिम्मेदार हो सकते हैं ।16 साल तक सीता बच्चों का क्या हुआ यह देखा तक नहीं लव कुश की कहानी के बाद यानि चारो भाइयों के बच्चों को सत्ता सौंपने केबाद वे सबने शरीर त्याग दिए मगर आगे की कहानी कहाँ लव कुश या बाकि भाइयों के बच्चों की कहीं ये उपन्यास ही तो नहीं एक बार तो मन में यह भी विचार आ ही जाता है ।

    • Utter kand m shambuk k vad ki charcha hui h to phir uska Karan kya tha aur Mahabharata m eklavya ko tirandaji nahi sikhai gai uska Karan kya tha aaj take shudro PR anay v atyachar ho rahe h uska Karan kya h sits ravan k pass thi to ram b to sits s alag that usko kyon agni priksha d gai lakshman apni patni urmila ko virah ki aag m chhod kr kyon ram k sath gya urmila ki sexsual ichha kisne puri ki give me answer ram k bhagat ram k bare galat nahi sun sakte manusamriti k anusar shudro ko padhne likhne k aadhikar nahi phir ramayan ki rachna valmiki n kaise ki ramayan Mahabharata froud granth khaki baithe logo ki kalpna Hindu devi devta bhagwan the to vishav parshid kyon nahi hua bharat take kyon simit rahe aur ek sawal bharat ka naam bharat aadmi k naam PR rakha gya ya aurat k naam pr

    • लव कुश एवं तीनों भाइयों के २-२ पुत्रों में सम्पूर्ण अवध राज्य का बंटवारा स्वयं राम ने अपने ही जीवन काल में कर दिया था | अवध का राज्य क्षेत्र अफ्रीका,अरब से लेकर चीन, पूर्वीद्वीप समूह, श्रीलंका तक था| आगे के वंश की सारिणी भी सूर्यवंश व चन्द्र वंश की श्रंखला में दी गयी है |

    • Agar kisi ke knowledge prapt karne se koi mar jata aur yah baat sunkar ram kisi ko jaan leta h so bad I hate ram and Hinduism

    • Dr pushpa ghar ki baat se nikal kar social ki sochogi to achha rahega waise bhi ek kahawat h ki aurat ko naak Na ho to mal bhi kha leti

  12. UTTARA Kanda is not reliable enough! The orginal ramayana ,written by sri valmiki doesn’t include uttar ramayana.
    This khand contains several questionable and polished content. So Ram did not do such killing…Short yet powerful…Jai Shree Ram

  13. Bhai yudh kand to 127/ 23 shok je baad end Ho Gaya hi kaha se reference Diya hi

  14. 1 minutes…Mahabharat m dronacharya ne aklavya ki ungali q kat li thi? Kyu ki wo shudra tha..bina shiksha diye hi guru dakshina le li??? Usko shiksha dene s inkar kiya or bola m shudro ko shiksha deta…or shudra hone ki wajah se uski ungali kat li.. Or ek bat shudra hone ki wajah s karn ko dronacharya n shiksha dene se inkar kiya..tb usne parsuram se shiksha li…dropadi ne shudra samaj kr swayamvar m bhag nhi lene diya….ye sb kya hai??????ye sabit karta hai tb bhi castism tha…chalo wo shudra hone ki wajah se eklavya ko shiksha nhi di fir usse guru dakshina q li???? Wo b right hand ka angutha???? Kyo ki shudra aage na aaye….ye bhedbhav kiya usne….

  15. Or ha koun kahta hai ki Ramayana or Mahabharata k samay m shudro ko shiksha ka adhikar tha?? ?? ya koi asa example do jisme koi brahman ne kisi shudra ko shiksha di ho… Koi nhi asa….ye bhedbhav nhi to or kya hai batao????? ???

  16. अमित गुप्ता

    Dr Vivek Arya Ji

    आप डॉ की उपाधि लेने के बाद क्या ऐसी सोच में विशवास रखते है की किसी व्यकित की तपस्या करने से उस राज्य में महामारी या कोई बीमारी फैल सकती है?

    कृपया अपनी उन पुस्तकों को उठाकर सत्य बोलना जिन पुस्तकों के सही ज्ञान से आपने इस Dr की Degree को प्राप्त किया है जोकि हर किसी व्यकित को प्राप्त करना बहुत कठिन है।

    और दूसरी और मैं इस बात पर भी प्रकाश डालना चाहता हूँ की, आपने जहाँ राम के गुनाहों पर पर्दा डालने की कौशिस की है वही आपने शूद्रों के साथ हुए अत्याचारों को भी दबाया है।
    में आपको बता दूँ की शूद्रों का किस तरह अपमान और दमन किया गया है ;

    मनु महाराज द्वारा बनाए गई चार वर्ण मतलब
    ब्राह्मण
    क्षत्रिय
    वेश्य
    और शुद्र जिसमे सभी छोटी जाति शामिल है अगर आज की पहचान बताएं तो (SC/ST/OBC/Minorities)

    शुद्रों को न ही किसी वेद में बड़ा बताया और न ही परिश्रमी बल्कि उनके साथ नीचता का व्यवहार किया।
    मनु ने कहा ;
    किसी भी शुद्र को धन इकट्ठा करने का अधिकार नहीं है।

    अगर कोई शुद्र अपनी जीभ से भगवान का नाम ले तो उसकी जीभा तुरंत काट दी जाए।

    अगर कोई शुद्र मंत्र सुने तो उसके कान में पिघलता कांच दाल दिया जाए।

    अगर की शूद्र का पहला बच्चा लड़का हो तो उस बच्चे को गंगा को समर्पित कर दिया जाए।

    शूद्रों के गले में हांडी लटका दी गई ताकि उनका थूक जमीन पर न गिरे और उनकी कमर पर झाड़ू लटका दी गई ताकि उनके पैरों के निशान जमीन पर न पड़े रहें, आदि आदि…..

    क्या ऐसे कानून का पालन करने वाले थे राम जो अच्छे और बुरे को न समझ पाए।

  17. Aksar log galat karne ke bad paap mitane ki koshish karta hai jaise ram ne kiya

  18. srishti hi sab kuch hain koi sreshta nahin koi neech nahin sab samaan hain dosto.

  19. Iska matlab Ramayan me adhi gapp hai, Janha bahot si jagah juth likha hai

  20. ashwani chandra

    Great article but it doesn’t prove how and when the valmiki ramayana was adulterated with such texts as mentioned in utaar kand.

    If the text is untrue then it should me addressed nationally and revised from all the versions of ramayana. As many ourohits on benares ghats proudly declare that they believe in caste system.

    The indirect suggestions that you have made by referring to vedas and upanishads are consoling to the heart but donot get the job done but are more like beating around the bush.

    If there is an linguistic adulteration then it should addressed by a more direct approach.

    If uttar kand is an adulteration then I believe as moral obligation your organization should take the initiative of removing it from Ramayan’s text because all this preaching is inefficient when we have gurus giving sermons in the same text.

    Thanks and Regards,
    Ashwani

  21. will people talk about science and progress , or we shall only talk about religion and people in the religion , or what have they done etc. in present scenario no human being can live without the inventions of science and engineering because only inventions help us to live better life. people can live without GOD but they can not sustain without science and engineering.

  22. तपस्वी शंबुक तेली का वध करने वाला राम आदर्श कैसे

  23. Innocent Shambuk Teli ka vadh karane vala Ram ko Adarsh kyo mana jata hai?

    • Nitu ajay singh

      Dekhiye hamne padi hai ramayan mahabharat vedas puranas etc.sabhi tark ki kasauti par scienctific views se galat and fake sabit hone lagta hai.sirf ye books hai jaise shakespeare wordsworth tagore and aaj v log likhte hai .

  24. kishor pandit

    Very nice
    जी श्रीमान मैक्समूलर ने करवाई हमारे ग्रंथों में गलतियां

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