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बेरोजगार हिन्दुओं के लिए बिज़नस प्लान


allah malik

बेरोजगार हिन्दुओं के लिए बिज़नस प्लान

बिलकुल मुफ्त

हमारे देश में लाखों हिन्दू बेरिजगार हैं। उनके लिए मैं एक दम परफेक्ट १००% रोजगार की गारन्टी के साथ, चंद महीनों में लखपति बनने का बिज़नस प्लान लेकर आया हूँ।

किसी भी सुनसान जगह पर जो किसी हाईवे पर हो शहर की समीप ही हो छोटा सा चबूतरा बना कर ४ मूर्तियों की स्थापना कर दो

साई बाबा शिरडी वाले की, शनि देव की ,हनुमान की और शिव की मूर्तियाँ वहाँ पर स्थापित कर दो।

१. साई बाबा शिरडी वाला- उसकी तो सबसे बड़ी मूर्ति लगाओ। वीरवार के दिन तो मेला ही लग जायेगा।

अंधे भगत मन में यही मन्नत लेकर आएँगे की उन्हें कुछ न करना पड़े सब कुछ साई ही कर दे। जिसके पास कुछ नहीं हो जोकि कंगला हो वो तो मिलने की इच्छा से आयेगा, जिसके पास हो वो इस भय से आयेगा की उसका कोई छीन न ले।

कोई यह नहीं जानना चाहता की साई जीवन भर मस्जिद में रहा, नमाज अदा करने और माँस खाने के उसे शोक थे। कोई यह भी नहीं जानना चाहता था की अध्यातम मार्किट गुरु साई बाबा के सभी चमत्कार महाराष्ट्र के एक छोटे से गाँव तक ही क्यूँ सीमित रहे जबकि पूरे भारत में उसके जीवन काल में अंग्रेजों का राज रहा और करोड़ो भारतीय भयानक अकाल,प्लेग, भूकंप ,हैजा और अगर फिर भी कोई बच गए तो अंग्रेजों के अत्याचार से अपनी अकाल मौत मारे गए।

बोलो अध्यातम मार्किट गुरु साई बाबा की जय।

२. शनि देव की मूर्ति- चंद वर्षों पहले तक तो कोई उसे भगवान ही नहीं मानता था, अब तो हजारों लीटर के सरसों के तेल से शनि की मूर्ति को स्नान करवाया जाता हैं। गज़ब भगवान हैं चंद सिक्कों और तेल से क्रोध एक दम शांत। अरे भई यह तो सोचो की ईश्वर को कब क्रोध आने लगा। जो जैसा करेगा वो वैसा भरेगा।

सारे हफ्ते भर भर कर पाप करो और वीकेन्ड पर शनिवार को जाकर तेल चढ़ा कर रिश्वत दे दो की शनि महाराज बचा लेना।

और हा शनि मंदिर से घर जाते ही दोस्त लोग मुर्गे-दारू (कहीं कहीं लड़की) के साथ आपका इन्तजार भी कर रहे होंगे। उन्हें मत भूलना।

यह हो गया हो गया अध्यातम गंगा में स्नान।

३. हनुमान जी की मूर्ति- एक समय बल, ब्रहमचर्य , नैतिक आचार के प्रतीक के रूप में वीर वर हनुमान जी ने ख्याति प्राप्त की थी।

आज तो साई और शनि के आगे इन बेचारों की मार्किट डाउन हैं।

मर्यादा पुरुषोतम श्री राम चन्द्र जी महाराज और उनके महान चरित्र से तो सन २००० के बाद पैदा हुई एक पूरी पीढ़ी लगभग अनभिज्ञ ही हैं। उनके लिए तो साई और शनि ही भगवान हैं। थोड़े बहुत के लिए यह अंग्रेजी में ape god हैं।

थोड़ी बहुत कृपा कार्टून चैनल ने हनुमान जी के कार्टून बना कर कर दी हैं पर व्यावहारिक रूप से तो मंगलवार के केवल एक ही महत्व हमें दीखता हैं। वह हैं इस दिन अंडे,माँस और शराब को हाथ नहीं लगाना।

यह भी कुछ कुछ वैसा ही हैं की सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली। पूरे हफ्ते जम कर ऐश मंगलवार को दोनों कान पकड़ लो की आज नहीं खायेंगे। शायद समझ रहे होते हैं की ईश्वर को बनाना हैं जबकि सत्य यह हैं की यह अपने आपको बेवकूफ बनाने से ज्यादा कुछ नहीं हैं।

वैसे तो मंगलवार के दिन ज्यादा भीड़ नहीं होगी पर फिर भी कुछ भूले भटके आ जायेंगे इसलिए हमारे बिज़नस प्लान में हनुमान को हमने शामिल कर लिया हैं।

४. बेचारे शिव भगवान को सोमवार का दिन मिला हैं। हफ्ते की शुरुआत हैं। बोनी का दिन होता हैं।

पहले बहुत लोग आते थे। कुँवारे सुन्दर पत्नी माँगने आते थे, लडकियाँ १६ सोमवार का व्रत रखकर अपने लिए पति मांगती थी।

अब धीरे धीरे इनकी मार्किट पर भी साई बाबा का कब्ज़ा हो गया हैं।

घरों से तो पिता शिव की जगह उनके पुत्र गणेश ने ले ली हैं।

मंदिरों में साई बाबा आ विराजे हैं।

कैलाश पर चीन का कब्ज़ा हो गया हैं।

अब जंगल ही ठिकाना बचा हैं। वो भी कटते जा रहे हैं।

वर्ष में केवल सावन में अपनी खोई प्रतिष्ठा वापिस मिलती हैं। जब भंग का नशा करने वालो के मुख से बम बम सुनाई देता हैं।

सोमवार,मंगलवार, वीरवार और शनिवार के अलावा रविवार तो फुल डे आना जाना रहेगा। इसलिए बिज़नस बढ़िया रहने की उम्मीद हैं।

केवल बुधवार और शुक्रवार को रेस्ट डे मिलेगा जोकि आवश्यक हैं।
अगर इससे भी टारगेट यानि की लक्ष्य की पूर्ति न हो तो नवरात्रों में वर्ष में दो बार देवी की मूर्ति लगाने से नो दिन बहार ही बहार रहेगी।

ज्यादा मन करे तो देवी की भेंटें गाने वाले सलीम को बुला लेना। चन्दा खूब जमा हो जायेगा।

इससे भी मन न भरे तो साई संध्या करवा लो। और बुलाओ किसे ?

हिन्दुओं को कैसे मुसलमान बनाया जाये इस विषय पर लिखी गयी पुस्तक “दाइये इस्लाम” के लेखक, गाँधी को इस्लाम की दावत के लेखक निजामुद्दीन दरगाह के ख़वाजा हसन निजामी के खादिमों में से एक के वंशज हमसर हयात निज़ामी को बुलाकर साई संध्या करवाना हिन्दू समाज में सेक्युलर होने का प्रतीक बन गया हैं।

अरे मुर्ख हिन्दू कौम तुझे १००० साल से भी ज्यादा पिटने के बाद, भारत को दो टुकड़े करवाने के बाद, करोड़ो हिन्दू भाइयों को इस्लाम/ईसाइयत ग्रहण करवाने के बाद भी अगर यह समझ नहीं आया की आर्य वैदिक धर्म क्या हैं तो कब आयेगा।

इसलिए आँखे खोल और पहचान की तेरा असली शत्रु तेरी अज्ञानता हैं जिसके कारण अन्धविश्वास और पाखंड को अपनाकर तू अपना नाश करने पर तुला हुआ हैं।

यह लेख हिन्दू समाज में हो रही अध्यात्मिक दुर्गति को दर्शाता हैं।

पाठक निष्पक्ष रूप से पढ़ कर चिंतन मनन करे।

डॉ विवेक आर्य

हिन्दू समाज में अन्धविश्वास


bansal and superstitions

हिन्दू समाज में अन्धविश्वास

भारत सरकार के रेल मंत्री पवन कुमार बंसल ने अपने पद से भ्रष्टाचार के कारण त्याग पत्र दे दिया हैं।

यह तो समय ही बताएगा की सत्य क्या हैं।

पर एक खबर और सामने आई की ज्योतिषियों की सलाह पर अपना पद बचाने के लिए उन्होंने बकरी की बलि दे दी फिर भी कुर्सी हाथ से चली गई।

मेरे जैसे सभी जिज्ञासु व्यक्तियों के मन में कुछ शंकाओं ने जन्म ले लिया।

समझदार लोग हमारी इन शंकाओं का समाधान कर हम पर कृपा करेगे ऐसा विचार हैं।

१. क्या बकरी, भेड़ आदि की बलि से किसी के सर पर जो विपत्ति होती हैं वह टल जाती हैं? रेलमंत्री के मामले में तो बलि देने के बाद भी उनकी कुर्सी चली गयी।

२. एक निरीह, मूक प्राणी का क्या दोष हैं जिसके लिए उसकी बलि दे दी जाती हैं?

३. क्या बकरी आदि की बलि देने से पाप कर्म नहीं कहा जायेगा? जिसका फल भोगना अनिवार्य हैं।

४. जब कर्म-फल का वैदिक सिद्धांत वेदों में स्पष्ट कहा गया हैं की जो जैसा करेगा वैसा भरेगा तो उसे नकार कर बलि प्रथा, जादू-टोना आदि अन्धविश्वास अज्ञानता के प्रतीक नहीं तो और क्या हैं?

५. जब सोमनाथ, गुजरात के मंदिर पर आक्रमण किया गया तब मंदिर के पूजारियों ने वीर राजपूतों को मुहम्मद गज़नी का सामना करने से यह कहकर मना कर दिया था की मंदिर युद्ध होने से अपवित्र हो जायेगा। मंदिर की रक्षा और शत्रुओं के संहार के लिए भगवान शिव भैरव और नन्दी को भेज देंगे। पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ और मंदिर विधर्मियों द्वारा नष्ट कर दिया गया। अन्धविश्वास के कारण हमें इतने दुःख और कष्ट भोगने पड़े हैं फिर भी हम अन्धविश्वास को त्यागने का क्यूँ नाम नहीं लेते।

६. कई बार सुनने में आता हैं की एक तांत्रिक ने एक महिला जिसके पुत्र उत्पन्न पैदा नहीं होता था के लिए दूसरे के पुत्र की बलि दे दी। क्या मर्यादावान समाज में इस प्रकार के अन्धविश्वास के लिए कोई स्थान हैं?

७. हिन्दू समाज के अन्धविश्वास को देखकर अनेक विधर्मी उनका परिहास करने का , निंदा करने का प्रयास करते हैं जिससे अनेक बुद्धिजीवी लोग हिन्दू धर्म को त्यागकर या तो विधर्मी बन जाते हैं अथवा नास्तिक बनकर भोगवादी बन जाते हैं। इससे हिन्दू समाज के बड़े पैमाने पर क्षति हुई हैं और हो रही हैं।

८. समाज में पठित वर्ग एक से बढ़कर एक अन्धविश्वास में लिप्त हैं जिसके कारण उनका अनुसरण करने वाले अपठित वर्ग में यह बीमारी विकराल रूप धारण कर लेती हैं। एक भ्रष्टाचारी अपनी काली कमाई के भय के कारण बढ़ चढ़ कर अन्धविश्वास में भाग लेता हैं। उसकी काले धन से हुई आर्थिक उन्नति को देखकर सामान्य वर्ग इस भ्रम में पड़ जाता हैं की उसकी उन्नति का कारण अन्धिविश्वास के रूप में किया गया कोई कार्य हैं। जबकि सत्य यह हैं की ईमानदारी से किया गया परिश्रम सदा सुख देने वाला हैं।

९. कोई भी अन्धविश्वास विज्ञान के अनुकूल नहीं हैं। फिर इस पाखंड में लिप्त होना अज्ञानता नहीं तो और क्या हैं। वेदों में पशु बलि आदि के विधान के बारे में जो बताया जाता हैं वो असत्य हैं क्यूंकि वेदों में सभी प्राणीयों के साथ मित्र के समान व्यवहार करने का आदेश हैं नाकि उनकी बलि देने का आदेश हैं। मध्य काल में कुछ मांस भोगी अज्ञानी लोगो ने वेद मन्त्रों के गलत अर्थ निकल कर वेदों में बलि प्रथा, माँसाहार और जादू टोन आदि को दर्शाने का असफल प्रयास किया हैं।

१० . मनुष्य के जीवन का उद्देश्य दुखों से छुटना हैं और सुख की प्राप्ति हैं। अन्धविश्वास का केवल और केवल एक ही परिणाम हैं वह हैं दुःख। धर्म की मूल परिभाषा पुरुषार्थ करते हुए जीवन में श्रेष्ठ कार्य करते हुए मोक्ष अर्थात सुख को प्राप्त करना हैं।

आशा हैं की पाठक अन्धविश्वास के विरुद्ध आवाज़ उठायेंगे जिससे अज्ञान का नाश हो और सत्य की स्थापना हो सके।

डॉ विवेक आर्य

हिन्दू समाज की दुर्दशा


shani

आज शनिवार हैं। सुबह सुबह हिन्दू समाज के सदस्यों को मैंने आज शनि भगवान के मंदिर में जाते हुए देखा। मन में उत्सुकता हुई की यह शनि भगवान कौन हैं और ये लोग शनि मंदिर क्यूँ जा रहे हैं।

पूछने पर मुझे एक भले मानस से उत्तर मिला की शनि भगवान के क्रोध से बचने के लिए, उनके प्रकोप से बचने के लिए वे व्यक्ति शनि मंदिर जा रहे थे।

मैंने उनसे पूछा की शनि मंदिर में जाकर आप क्या करते हैं?

वे बोले की भक्त गन शनि भगवान की मूर्ति पर तेल चढ़ाते हैं और पैसे चढ़ाते हैं। इससे शनि भगवान का क्रोध शांत हो जाता हैं और हम उनके प्रकोप से बच जाते हैं।

मैंने उनसे पूछा अच्छा एक बात तो बताये की क्या भगवान क्रोध करते हैं और अगर करते भी हैं तो क्यूँ करते हैं?

वे सज्जन कुछ पल के लिए चुप से हो गए और अटकते हुए बोले की हम जो भी गलत कार्य करते हैं , भगवान् उसका हमें दंड देते हैं। उस दंड से बचने के लिए हम भगवान् की भक्ति करते हैं। भक्ति तो किसी भी रूप में हो सकती हैं। हम तेल से उनकी भक्ति करते हैं।

मैंने उनसे पूछा की यह कैसे भगवान हैं जो थोड़े से तेल और कुछ पैसो में ही भक्तों के पाप क्षमा कर देते हैं।

बड़ा बढ़िया तरीका हैं पूरे सप्ताह जमकर पाप करो और शनिवार को कुछ ग्राम तेल शनि मंदिर में आकर अर्पित कर दो

काम बन जायेगा।

वे सज्जन नमस्ते कर आगे बढ़ गए।

मैं अपने मन में ईश्वर के गुण, कर्म और स्वाभाव पर विचार करता रहा की वेदों में ईश्वर को दयालु एवं न्यायकारी कहा गया हैं।

ईश्वर दयालु इसलिए हैं की वो हर उस व्यक्ति को उसके द्वारा किये गए पाप कर्म का दंड अवश्य देते हैं जिससे वह व्यक्ति आगे उस पाप कर्म को न करे। इसे दयालुता ही तो कहेगे नहीं तो अगर पापी व्यक्ति को दंड ना मिले तो दिन प्रतिदिन बड़े से बड़ा पाप करने में वह सलंग्न रहेगा, जिससे की सम्पूर्ण सामाजिक व्यवस्था नष्ट हो जाएगी। और न्यायकारी इसलिए कहा गया हैं की किसी को भी उतना ही दंड मिलता हैं जितने उसने पाप किया हैं। न कम न ज्यादा।

आज कुछ अज्ञानियों ने ईश्वर की न्याय व्यवस्था को न समझ कर शनि की मूर्ति पर तेल चढ़ाने से पापों का क्षमा होना प्रचारित कर दिया हैं।

यह न केवल ईश्वर की कर्म फल व्यवस्था का अपमान हैं अपितु अपने आपको भी मुर्खता के घोर अंधकार में रखने के समान हैं।

तेल चढ़ाने से न तो कोई पाप कर्म क्षमा होता हैं और न ही पापों में सलिप्त होने से मनुष्य बच पाता हैं।

इसे हिन्दू समाज की दुर्दशा ही तो कहना चाहिए की वेदों की पवित्र शिक्षा को त्यागकर हिन्दू लोग इधर उधर धक्के खा रहे हैं।

पाठक अपनी तर्क शील बुद्धि का प्रयोग कर स्वयं निर्णय करे की वे सत्य का वरण करना चाहेंगे अथवा असत्य का वरण करना चाहेंगे।

डॉ विवेक आर्य

फलित ज्योतिष पाखंड से जयादा कुछ नहीं हैं


दुसरो का भविष्य बताने वाले आशु भाई ज्योतिष आचार्य , वरुण इंक्लाव रोहिणी के यहाँ से ५० लाख रूपए की चोरी हो गयी. आशु भाई ज्योतिष आचार्य लोगों को किसी भी प्रकार की विपत्ति अथवा कठिनाई न आये अथवा कोई कठिनाई आ जाये तो उससे निपटने का समाधान बताते हैं.आशु भाई महाराज एवं उनके जैसे अन्य ज्योतिषियों से कुछ प्रश्न—

१. सभी ज्योतिषी दुसरो का भविष्य भली प्रकार से बताने का दावा करते हैं जबकि वे खुद का भविष्य नहीं बता पाते. आखिर क्यूँ?

२. आशु भाई अपनी ही जन्मपत्री, हस्त रेखा, माथा आदि देखकर यह क्यूँ नहीं बता सके की उनके यहाँ पर चोरी होने वाली हैं?

३. चोरो को पकड़ने के लिए उन्हें थाने में जाने की क्यूँ जरुरत पड़ी वे अपनी दिव्य शक्तियों से चोर कहाँ छिपे हैं उनका पता क्यूँ नहीं लगा सके?

४. दो व्यक्तियों पर चोरी का अंदेशा लगाया जा रहा हैं वे दोनों तीन वर्ष से आशु भाई के पास कर्मचारी के रूप में रह रहे थे. जब उनको आशु भाई ने नौकरी पर रखा तो उनकी जन्म पत्री देख कर आशु भाई यह क्यूँ नहीं जान पाए की यह भविष्य में चोरी करेगे?

आशु भाई या इनके जैसे अन्य ज्योतिषी केवल मात्र साधारण जनता को मूर्ख बनाने का कार्य करते हैं.

इनसे सावधान रहे और अन्य को भी इस प्रकार की ढोंगियों से सावधान करे.

(पाखंड खंडन के लिए जनहित में जारी)

TIMES OF INDIA newspaper link

http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2011-03-07/delhi/28665156_1_rs-50l-office-door

Open Challanege to all Sufis/Miya/Baba/Khans


भाई चिराग शर्मा जी

OPEN CHALLENGE

आजकल सभी अखबारों में ,रेलवे स्टेशनों पर रेल गाडियों ने बसों में तथा लगभग सभी सार्वजानिक दीवारों पर आपको औलियाओं ,मोलवियों ,बंगाली मियां जादूगर बाबाओ और तांत्रिको के विज्ञापन , स्टिकर व् पोस्टर लगे मिल जाएंगे जिनमे तरह – तरह के झूठे आश्वासनों और घटिया हथकंडो का सहारा लेकर भोले-भाले और मूर्ख ( खासकर महिलाओं ) लोगों को उनकी तकलीफों ,समस्याओं, गृह कलेशों, आर्थिक व् पारिवारिक अप्तियों ,प्रेम संबंधों आदि से छुटकारा दिलाने का झूठा और बेबुनियाद झांसा देकर फसाया जाता है और उनका आर्थिक ,मानसिक और शारीरिक शोषण किया जाता है और उनके दुःख – दर्द आदि का नाजायज फ़ायदा उठाया जाता हैं तथा उन्हें मानसिक रूप से विकृत बना दिया जाता हैं ,जबकि इन बदमाश औलियाओं ,मौलवियों ,बंगाली मियां जादूगर बाबाओ और तांत्रिको आदि के पास ऐसी कोई अल्ल्लोकिक ताक़त या इल्म आदि नहीं होता जिससे ये किसी का भला कर सकें अपितु ये खुद नशेडी ,ऐयाश, चालबाज़ ,धोकेबाज़ और अपराधिक परवर्ती के होते हैं !
जैसा कि हम अखबारों में पढ़ते हैं और T . V . पर समाचारों में देखते हैं की आये दिन फलां मौलवी या औलिया ने किसी महिला को निशिला पदार्थ खिला कर उसका शील भंग कर दिया और उसकी विडियो फिल्म बना कर उसे ब्लैक मेल करने लगा या किसी व्यक्ति का कोई काम करवाने के एवज़ में लाखो रूपये ठग लिए या किसी बाँझ महिला से किसी बच्चे कि क़ुरबानी करवा दी आदि !

इसलिए आज मै उन सभी करामाती औलियाओं ,मोलवियों ,बंगाली मियां जादूगर बाबाओ और तांत्रिको को खुली चुनोती देता हूँ कि वे निम्न में से किसी 1 चुनोती पर भी खरे उतर कर दिखा दे तो मै चिराग शर्मा आजीवन उनका चेला बनकर रहूँगा !

निम्न प्रकार के कार्य धोखारहित परिस्थितियों में करके दिखाएँ –

1- जो किसी सीलबंद करेंसी नोट की ठीक नकल पैदा कर सकता हो।
2- जो किसी सीलबंद करेंसी नोट का नंबर पढ सकता हो।
3- जो जलती आग में अपने पीर आदि की सहायता से आधे मिनट के लिए नंगे पैर खडा हो सकता हो।
4- ऐसी वस्तु जो मैं मांगूं, हवा में से प्रस्तुत कर दे।
5- टेलीपैथी द्वारा किसी दूसरे व्यक्ति के विचार पढ कर बता सकता हो।
6- मनोवैज्ञानिक शक्ति से किसी वस्तु को हिला या मोड सकता हो।
7- इबादत , रूहानी ताक़त जम-जम पानी से या पाक राख से अपने शरीर को एक इंच बढा सकता हो।
8- जो रूहानी ताक़त से हवा में उड सके। ( पीर बाबा ध्यान दें )
9- रूहानी ताक़त से पांच मिनट के लिए अपनी नब्ज रोक सके।
10- पानी पर पैदल चल सके।
11- अपना शरीर एक स्थान पर छोड कर दूसरी जगह हाजिर हो।
12- रूहानी ताक़त से 30 मिनट के लिए श्वास क्रिया रोक सके।
13- रचनात्मक बुद्धि का विकास करे। इबादत या आसमानी ताक़त से अत्मज्ञान प्राप्त करे।
14- करामाती या रूहानी इल्म से कोई अनोखी भाषा बोल सके।
15- ऐसी रूह ,जिन , मुवकिल या खबीस हाजिर करे, जिसकी फोटो खींची जा सकती हो।
16- फोटो खींचने के बाद वह फोटो से अलोप हो सके।
17- ताला लगे कमरे में से रूहानी ताक़त से बाहर निकल सके।
18- किसी चीज का वज़न बढा सके।
19- छिपी हुई वस्तु को खोज सके।
20- पानी को शराब या पेट्रोल में बदल सके।
21- शराब को रक्त में बदल सके।
22- ऐसे आलमी ,औलिया ,मौलवी व् बंगाली मिया जादूगर जो यह कह कर लोगों को गुमराह करते हैं कि काला जादू वगराह वैज्ञानिक हैं, तो मेरी चुनोती स्वीकार करें ! यदि वे दस चित्रों या दस पत्रियों को देख कर आदमियों तथा औरतों की (समय आने पर) अलग अलग संख्या, जीवित तथा मरे की अलग अलग संख्या बता सकें या जन्म का ठीक समय और स्थान अक्षांस और देशान्तर रेखाओं सहित बता सकें। इसमें 10 प्रतिशत की गल्तियों की छूट होगी।

और जैसी कि मुझे उम्मीद ही नहीं पूरा विश्वास है कि मेरी ये कुछ तुच्छ चुनोतियाँ कोई माई का लाल आलमी ,औलिया ,मौलवी व् बंगाली मिया जादूगर स्वीकार करने का दम नहीं रखता तो मै अपने सभी भाइयों – बहनों से से ये गुजारिश करता हूँ के आप इन बदमाशों के चक्कर में पड़कर अपना धन ,समय ,स्वास्थ्य और इज्जत न गवाएं !

आपकी समस्याओं का सबसे बेहतर समाधान केवल इश्वर के पास है जिसे आप अपने विवेक से ही प्राप्त कर सकते हैं !

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